
समय आ गया वतन के कर्ज चुकाने का
- अंचल ओझा
बारूदों पर चल कर जो वतन को पूजते हैं,
सिने पर गोली खाकर जो मर मिटते हैं,
उनकी जाबांज कहानी कहती भारत की रवानी,
सर पर बांध कर कफन तैयार हो जाओं ओ भारत की जवानी।
समय आ गया वतन के कर्ज चुकाने का।
सर पर बांध कर कफन तैयार हो जाओं ओ भारत की जवानी।
बस अब सांचे में ढलना होगा,
फिर से नया इतिहास हमें लिखना होगा,
भारत की आजादी को सार्थक करने,
भगत, आजाद, सुभाष के पद चिन्हों पर चल,
राम-कृष्ण की इस धरती को फिर से स्वर्ग बनाना होगा।
क्रांति की एक नई मशाल जलाना होगा,
देश की बागडोर युवा कंधों को सौंपना होगा,
राजनीति से दूर हटकर, राष्ट्रनीति पर सोचना होगा,
इस हेतु सर पर बांध कर कफन,
तैयार हो जाओं ओ भारत की जवानी।
पाठशाला, मदरसे में पढ़ना अब र्प्याप्त नहीं,
बस अब सांचे में ढलना होगा,
लाहौर से इस्लामाबाद तक तिरंगा लहरा,
आतंकियों को चुनौती देना होगा,
न होने देंगे अब माता की गोद खाली,
न होने देनें अब सुहागिनों मांग खाली,
न होने देगें अब बहनों की राखी खाली,
यह प्रण हमें करना होगा,
इस हेतु सर पर बांध कर कफन,
तैयार हो जाओं ओ भारत की जवानी।
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